शुक्रवार, 15 मई 2026

Come Follow to You Vol 1 10

 नीचे दिए गए सात प्रश्नों और ओशो के उत्तरों का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। यह प्रश्नोत्तर सत्र 'कम फॉलो टू यू वॉल्यूम 1' के अंतिम भाग का है।


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प्रश्न 1:

क्या आप कभी रोते हैं?


उत्तर:


हाँ, जब भी मैं तुम्हें देखता हूँ। तुम मेरे आँसू नहीं देख सकते, तुम मेरी पुकार नहीं सुन सकते, लेकिन जब मैं तुम्हें देखता हूँ, तो वह पुकार हमेशा वहाँ होती है। इसी कारण, मैं तुम पर काम करता रहता हूँ। यह केवल तुम्हें तुम्हारी दुर्दशा से बाहर निकालने में मदद करने के लिए नहीं है; यह अपनी मदद करने के लिए भी है। यदि तुम अपनी दुर्दशा से बाहर आ जाते हो, तो मैं अपनी उस दुर्दशा से बाहर आ जाऊँगा जो तुम्हारी दुर्दशा द्वारा पैदा की गई है।

Come Follow to You Vol 1 09

 नीचे लूका 9:57-62 के सुसमाचार अंश और ओशो के उस पर दिए गए प्रवचन का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है।


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लूका 9

57 और ऐसा हुआ कि जब वे मार्ग में जा रहे थे, तो एक व्यक्ति ने उससे कहा, "प्रभु, मैं जहाँ कहीं तू जाए, तेरे पीछे चलूँगा।"

58 यीशु ने उससे कहा, "लोमड़ियों के बिल होते हैं, और आकाश के पक्षियों के घोंसले होते हैं; परन्तु मनुष्य के पुत्र के पास सिर रखने को भी जगह नहीं है।"

59 उसने दूसरे से कहा, "मेरे पीछे चल आ।" परन्तु उसने कहा, "प्रभु, पहले मुझे जाकर अपने पिता को दफनाने दे।"

60 यीशु ने उससे कहा, "मुर्दों को अपने मुर्दे दफनाने दे; तू जा और परमेश्वर के राज्य का प्रचार कर।"

61 एक और ने भी कहा, "प्रभु, मैं तेरे पीछे चलूँगा; परन्तु पहले मुझे अपने घर के लोगों से विदा लेने दे।"

62 यीशु ने उससे कहा, "जो कोई हल पर हाथ रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं है।"

Come Follow to You Vol 1 08

 नीचे दिए गए अंग्रेजी प्रवचन (Come Follow to You Vol 1, प्रकरण 08) का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। यह एक प्रश्नोत्तर सत्र है।


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प्रश्न 1:

जिस व्यक्ति को जीवन भर विश्लेषण (analyze), प्रश्न (question) और संदेह (doubt) करने के लिए प्रशिक्षित (trained) किया गया है, वह संदेह और विश्वास (trust) के बीच की खाई को कैसे पाट सकता है?


उत्तर:


संदेह (doubt) अपने आप में सुंदर है। समस्या तब पैदा होती है जब तुम उसमें फंस (stuck) जाते हो। तब संदेह मृत्यु बन जाता है। विश्लेषण तब सही होता है जब तुम उससे अलग (seperate) और दूर (aloof) रहते हो। यदि तुम उससे तादात्म्य (identified) बन जाते हो, तो समस्या पैदा होती है। तब विश्लेषण एक पक्षाघात (paralysis) बन जाता है। यदि तुम महसूस करते हो कि तुम विश्लेषण, प्रश्न और संदेह करने के लिए प्रशिक्षित हो गए हो, तो दुखी मत हो। संदेह करो, विश्लेषण करो, प्रश्न करो, लेकिन अलग (seperate) रहो।

Come Follow to You Vol 1 07

नीचे दिए गए अंग्रेजी प्रवचन (मत्ती 9:9-13 और लूका 9:23-25 पर ओशो का प्रवचन) का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है।


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मत्ती 9

9 और जब यीशु वहाँ से आगे बढ़ा, तो उसने मत्ती नामक एक व्यक्ति को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उससे कहा, "मेरे पीछे चल।" वह उठा, और उसके पीछे हो लिया।

10 और ऐसा हुआ कि जब यीशु उसके घर में भोजन करने बैठा, तो कई महसूल लेने वाले और पापी आए और उसके और उसके चेलों के साथ भोजन करने लगे।

11 यह देखकर फरीसियों ने उसके चेलों से कहा, "तुम्हारा गुरु महसूल लेने वालों और पापियों के साथ क्यों खाता-पीता है?"

12 यह सुनकर यीशु ने उनसे कहा, "भले-चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को।"

13 पर जाकर सीखो कि इसका क्या अर्थ है, 'मैं दया चाहता हूँ, न कि बलिदान'; क्योंकि मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूँ।"

Come Follow to You Vol 1 06

 नीचे दिए गए छह प्रश्नों और ओशो के उत्तरों का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। यह प्रवचन 'कम फॉलो टू यू वॉल्यूम 1' के अंश पर आधारित एक प्रश्नोत्तर सत्र है।


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प्रश्न 1:

गुरु-शिष्य संबंधों में और सामान्य मानवीय संबंधों में गोपनीयता (secrecy) की क्या आवश्यकता है?


उत्तर:


अस्तित्व के दो पहलू हैं, बाहर और भीतर। बाहर को सार्वजनिक किया जा सकता है, लेकिन भीतर को नहीं। यदि तुम भीतर को सार्वजनिक कर दोगे, तो तुम अपनी आत्मा खो दोगे, अपना मूल चेहरा खो दोगे। फिर तुम ऐसे जिओगे मानो तुम्हारा कोई आंतरिक अस्तित्व ही नहीं है। जीवन नीरस, व्यर्थ हो जाएगा। यह उन लोगों के साथ होता है जो सार्वजनिक जीवन जीते हैं: राजनेता, फिल्म अभिनेता। वे सार्वजनिक हो जाते हैं, वे अपना आंतरिक अस्तित्व पूरी तरह खो देते हैं, वे नहीं जानते कि वे कौन हैं, सिवाय उसके जो जनता उनके बारे में कहती है। वे दूसरों की राय पर निर्भर होते हैं, उन्हें अपने अस्तित्व का कोई एहसास नहीं होता।

Come Follow to You Vol 1 05

 नीचे दिए गए अंग्रेजी प्रवचन (Come Follow to You Vol 1, प्रकरण 05) का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। यह ओशो द्वारा मत्ती के सुसमाचार के अंशों पर दिया गया एक आध्यात्मिक प्रवचन है।


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मत्ती 4

17 उस समय से यीशु प्रचार करने लगा और कहने लगा, "मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।"

18 और यीशु गलील की झील के किनारे-किनारे चलते हुए दो भाइयों, यानी पतरस कहलाने वाले शमौन और उसके भाई अन्द्रियास को, झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछुए थे। 

19 उसने उनसे कहा, "मेरे पीछे आओ, मैं तुम्हें मनुष्यों के मछुए बनाऊँगा।" 

20 वे तुरन्त अपने जाल छोड़कर उसके पीछे हो लिए।

Come Follow to You Vol 1 04

 नीचे दिए गए छह प्रश्नों और ओशो के उत्तरों का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। यह ओशो के प्रवचन 'कम फॉलो टू यू वॉल्यूम 1' के अंश पर आधारित प्रश्नोत्तर सत्र है।


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प्रश्न 1:

आपके डायनामिक मेडिटेशन के एक ही सत्र ने मेरे भीतर इतना आनंद और अस्तित्व का एहसास भर दिया है, जितना बीस वर्षों तक नए नियम की कहानियाँ सुनने और एक सर्वशक्तिमान तथा दूरस्थ ईश्वर से प्रार्थना करने में नहीं मिला, जो मेरे लिए एक अअनुभवनीय गोदो (Godot) बना रहा। क्या यह संभव है कि यीशु की शिक्षाएँ सभी साधकों के लिए सहायक न हों – हाँ, यहाँ तक कि उनके लिए, या कुछ के लिए, विषैली भी हो सकती हैं?


उत्तर:


ईसाई धर्म और मसीह (Christ) को कभी भ्रमित नहीं करना चाहिए। मसीह ईसाई धर्म से बिल्कुल अलग है, इसलिए जब भी तुम मसीह को समझना चाहो, सीधे और तुरंत जाओ – रोम के रास्ते नहीं; तब तुम कभी मसीह को नहीं समझ पाओगे। मसीह, कृष्ण या बुद्ध को संगठित नहीं किया जा सकता: वे इतने विशाल हैं कि कोई भी संगठन उनके साथ न्याय नहीं कर सकता। केवल छोटी चीजों को संगठित किया जा सकता है।

Come Follow to You Vol 1 03

 नीचे दिए गए अंग्रेजी प्रवचन का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। यह ओशो द्वारा दिया गया एक आध्यात्मिक प्रवचन है, जिसमें जॉन द बैप्टिस्ट और यीशु के प्रसंगों की व्याख्या की गई है।


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हिंदी अनुवाद:


मैंने एक कहानी सुनी है – यह उन दिनों की है जब शूरवीर और महल हुआ करते थे। एक युवा अंग्रेज़ अपनी किस्मत तलाश रहा था, पूरी भूमि पर भटक रहा था। थक कर, वह एक महल के पास एक पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रुका। महल का ड्यूक वहाँ से गुज़र रहा था। वह रुका और पूछा कि युवक वहाँ क्यों इंतज़ार कर रहा है, वह किसकी तलाश में है। युवक ने कहा, "मैं एक वास्तुकार हूँ और मैं काम की तलाश में हूँ।"

Come Follow to You Vol 1 02

 नीचे दिए गए छह प्रश्नों और ओशो के उत्तरों का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। यह प्रश्नोत्तर सत्र मत्ती 9 और लूका 9 पर दिए गए प्रवचन के बाद आते हैं।


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प्रश्न 1:

आपके लिए रास्ता किसने तैयार किया?


उत्तर:


किसी ने भी मेरे लिए रास्ता नहीं तैयार किया है, और न ही मैं किसी के लिए रास्ता तैयार कर रहा हूँ। यह समझना होगा।


चार संभावनाएँ हैं। पहली, सबसे पुरानी और सबसे अधिक उपयोग की गई, वह है जो यीशु के मामले में हुई। जॉन द बैप्टिस्ट ने रास्ता तैयार किया; शिष्य गुरु से पहले आया। इसके अपने लाभ हैं, लेकिन इसकी अपनी सीमाएँ और दोष भी हैं – ऐसा होना ही है। 

जब शिष्य गुरु से पहले आता है, तो वह अपनी सीमाएँ पैदा करेगा और गुरु को उन्हीं सीमाओं के भीतर कार्य करना होगा। इसके लाभ हैं क्योंकि जब गुरु आता है, तो उसे जमीन तैयार करने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी – जमीन तैयार होगी; वह तुरंत बीज बोना शुरू कर सकता है – लेकिन जमीन शिष्य के अनुसार तैयार होगी। यह गुरु के अनुसार नहीं हो सकती, इसलिए उसे सीमाओं के भीतर कार्य करना होगा। इसी ने यीशु की कहानी में पूरी परेशानी पैदा की।

Come Follow to You Vol 1 01

 नीचे यूहन्ना (John) 1 के अंश और ओशो के उस पर दिए गए प्रवचन का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। मैंने भाषा को सरल, प्रवाहपूर्ण और मूल के अनुरूप रखने की कोशिश की है।


यूहन्ना 1 (John 1)


1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।

3 सब कुछ उसी के द्वारा बनाया गया, और जो कुछ बना, उसमें से कोई भी उसके बिना नहीं बना।

4 उसमें जीवन था, और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी।

5 और वह ज्योति अंधकार में चमकती है, और अंधकार उसे समझ नहीं पाया।

6 परमेश्वर की ओर से एक मनुष्य भेजा गया, जिसका नाम यूहन्ना था।

7 वह गवाही देने आया, उस ज्योति की गवाही देने, ताकि सब लोग उसके द्वारा विश्वास करें।

मंगलवार, 5 मई 2026

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The Psychology of the Esoteric 6 विश्लेषण मेरी दृष्टि मे, सातों शरीर, सातों सपने: ओशो की गहन आध्यात्मिक व्याख्या

प्रश्न 1: क्या आप समझा सकते हैं कि सपनों (ड्रीम्स) से आपका क्या अभिप्राय है?


 सातों शरीर और उनके सपने: ओशो की गहन व्याख्या

"सपना सबसे महान गूढ़ क्षेत्रों में से एक है। मैंने इसके बारे में कुछ कहा है ताकि आप सचेत होना शुरू कर सकें।" — ओशो

परिचय: सपनों का बहुआयामी संसार

हमारे जीवन का एक तिहाई हिस्सा नींद में बीतता है। इन नींद की घड़ियों में हम सपने देखते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सच में पूछा है—सपना क्या है?

पश्चिमी विज्ञान कहता है: सपने केवल मस्तिष्क की यांत्रिक प्रक्रिया हैं।

पश्चिमी मनोविज्ञान कहता है: सपने दबी हुई इच्छाओं का प्रतिबिम्ब हैं।

लेकिन ओशो एक पूरी तरह अलग और गहरी सच्चाई बताते हैं। उनके अनुसार, हमारे सात शरीर हैं, और प्रत्येक के अपने-अपने सपने हैं। जब तक आप इन सातों को नहीं समझते, तब तक आप अपने स्वयं के अस्तित्व से ही परिचित नहीं हैं।

ओशो की वाणी

Come Follow to You Vol 1 10

 नीचे दिए गए सात प्रश्नों और ओशो के उत्तरों का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। यह प्रश्नोत्तर सत्र 'कम फॉलो टू यू वॉल्यूम 1' के अंतिम भाग ...